वित्तीय समावेशन क्या है?
जैसा कि नाम से पता चलता है वित्तीय समावेशन कम आय वाले लोग और समाज के वंचित वर्ग को वहनीय कीमत पर भुगतान, बचत, क्रेडिट आदि सहित वित्तीय सेवायें पहुँचाने का प्रयास है। इसे ‘समावेशी वित्तपोषण’ भी कहा जाता है।
वित्तीय समावेशन का मुख्य उद्देश्य उन प्रतिबंधों को दूर करना है जो वित्तीय क्षेत्र में भाग लेने से लोगों को बाहर रखते हैं और किसी भी प्रकार के भेदभाव के बिना उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वित्तीय सेवाओं को उपलब्ध करना है।
हमें वित्तीय समावेशन की आवश्यकता क्यों है?
समाज का एक बड़ा हिस्सा अभी भी बैंक रहित है। बिना बैंक वाले लोग ऐसे लोग हैं जिनके पास केवल मूल लेनदेन बैंक खाते हैं। ये ऐसे लोग हैं, जिन्होंने नेलदेन करने के लिए पारंपरिक उपकरण सुरक्षित किए हैं लेकिन यह डिजिटल निगमन के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
विश्व बैंक के अनुसार, लगभग 2 अरब लोग औपचारिक वित्तीय सेवाओं का उपयोग नहीं करते हैं और सर्वाधिक गरीब परिवारों में 50 प्रतिशत व्यस्क से अधिक बैंक रहितहैं।
इसने उन कम आय वाले लोगों के बीच वित्तीय अस्थिरताऔर गरीबी को उत्पन्न किया है जिनके पास वित्तीय सेवाओं और उत्पादों की पहुँच नहीं है। यहाँ बहुत कम बैंक हैं, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, कि ये बिना बैंक वाले उपयोगकर्ता या तो नकदी या चैक में लेनदेन करते हैं, जो उन्हें चोरी और धोखाधड़ी के प्रति कमजोर बना देता है।
यही कारण है कि हमें वित्तीय समावेशन की आवश्यकता है।
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